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Dhanteras Puja Vidhi

Dhanteras Puja Vidhi

Dhanteras Kuber Puja Vidhi 2018

Dhantrayodashi Puja Vidhi and Puja muhurt

 

Lord Kubera is the ‘treasurer of the gods’ and ‘king of Yaksha’. He is a true representation of wealth, prosperity and glory. Lord Kubera not only distributes, but as well maintains and guards all the treasures of this universe. Hence, he is also called guardian of wealth. Hindus worship Kuber as the treasurer of wealth and bestower of riches, along with deity Lakshmi before Diwali on the Dhanteras day. This custom of worshiping Lakshmi and Kuber together is in prospect of doubling the advantages of such prayers.

Significance of Kuber Puja

 

Goddess Lakshmi is that the creator of wealth and Lord Kuber is the guardian and distributor. Hence, the two are usually adored along. Kuber Puja is performed by people who need to urge obviate their cash issues and acquire a lot of wealth. This can even be done before beginning a brand new business also on gain material success.

The belief in Lord Kuber showering prosperity was strengthened by the story revolving round the Venkateshwara temple at Tirupati. According to the story, Vishnu took money from Kuber for his wedding ceremony with deity Lakshmi. This loan, Lord Vishnu can have to keep paying until the end of time. Devotees go to the temple and donate cash so that Lord Vishnu’s loan is cleared. This belief has led it to become one of the richest temples within the country. It is an unconventional way to show however prosperity is joined to Lord Kuber.

Benefits of Kuber Puja

 

Every human needs to prosper and can attempt to attain it. Lord Kuber is known to shower wealth upon those that worship him sincerely. The benefits of acting a Kuber Puja are believed to be:

  • It helps gets rid of monetary issues
  • Helps you be free of monetary debts
  • To gain wealth and success
  • Helps grow business and expand new ventures

धनतेरस के दिन कुबेर देवता की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में कुबेर देवता को धन देने वाले देवता में सबसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि कुबेर देवता धरती के नीचे दबे हुए है और वह हर तरह के धन और खजाने की रखवाली करते हैं। कुबेर को रावण का भाई माना जाता है। कुबेर रावण के पिता ‘विश्रवा मुनि’ की पहली पत्नी इलविला से उत्पन्न हुए थे। उन्हें अपने पिता विश्रवा की तरह धर्मालु और तपस्वी होने के कारण ब्रह्मा से लोकपाल होने का आशीर्वाद मिला।

कुबेर को भगवान शिवजी का परम मित्र माना जाता है। बेलपत्र से कुबेर की पूजा करने से कुबेर देवता जल्दी प्रसन्न होते हैं। कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को कुबेर देवता का पूजन किया जाता है। इस त्योहार को धनतेरस के रूप मनाया जाता है। इस दिन चांदी या तांबे का बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

कुबेर देवता की व्युत्पति मार्कण्डेय और वायु पुराण में बताई गई है, जिसमें ‘कु’ का अर्थ ‘निंदा’ हैं और ‘बेर’ का अर्थ ‘शरीर’ है। कुत्सित शरीर धारण करने के कारण यह कुबेर कहलाए। शास्त्रों में बताया गया है कि इन्हें यम, वरुण और इंद्र देवता की तरह चौथे लोकपाल और उत्तर दिशा का स्वामी बनाया गया था। इन्हें धन और यज्ञ का भी स्वामी माना जाता है।
जानिए क्यों मनाया जाता है धनतेरस और क्या हैं इस त्योहार का महत्व

मान्यता है ये तीन चरणों और 8 दांतों के साथ उत्पन्न हुए। इनकी धन के देवता के रूप में ख्याति हुई। राम कथा में बताया गया है कि पुष्पक विमान और लंका नगरी इन्हीं की थी, जिसे रावण छीनकर ले गया था।

कुबेर पूजा विधि

 

आपके पास श्री कुबेर की मूर्ति है तो वह पूजा में उपयोग की जा सकती है। अगर आपके पास कुबेर की मूर्ति नहीं है तो उसके बदले आप तिजोरी या गहनों के बक्से को श्री कुबेर के रूप में मानिये और उसकी पूजा कीजिये। तिजोरी, बक्से आदि की पूजा से पहले सिन्दूर से स्वस्तिक-चिह्न बनाना चाहिए और उस पर ‘मौली’ बाँधना चाहिए।

ध्यान (Dhyana)

सर्व प्रथम निम्नलिखित मन्त्र द्वारा श्री कुबेर का ध्यान करें।

मनुज बाह्य विमान स्थितम्, गरूड़ रत्न निभं निधि नायकम्।
शिव सखं मुकुटादि विभूषितम्, वर गदे दधतं भजे तुन्दिलम्।।

मन्त्र अर्थ – मानव-स्वरूप विमान पर विराजमान, श्रेष्ठ गरुड़ के समान सभी निधियों के स्वामी, भगवान् शिव के मित्र, मुकुट आदि से सुशोभित और हाथों में वर-मुद्रा एवं गदा धारण करनेवाले भव्य श्रीकुबेर की मैं वन्दना करता हूँ।

आवाहन (Aavahan)

भगवान् श्रीकुबेर का ध्यान करने के बाद तिजोरी-बक्से आदि के सम्मुख आवाहन-मुद्रा दिखाकर, निम्न मन्त्र द्वारा उनका आवाहन करें।
आवाहयामि देव त्वामिहायाहि कृपां कुरु।
कोशं वद्र्धय नित्यं त्वं परिरक्ष सुरेश्वर।।

मन्त्र अर्थ – हे देव, सुरेश्वर! मैं आपका आवाहन करता हूँ। आप यहाँ पधारें, कृपा करें। सदा मेरे भण्डार की वृद्धि करें और रक्षा करें।

॥मैं श्रीकुबेर देव का आवाहन करता हूँ॥

पुष्पाञ्जलि-आसन (Pushpanjali Asana)

आवाहन करने के बाद निम्न मन्त्र पढ़कर श्रीकुबेर देव के आसन के लिए पाँच पुष्प अञ्जलि में लेकर अपने सामने, तिजोरी-बक्से आदि के निकट छोड़े।

नाना रत्न समायुक्तं कार्त्त स्वर विभूषितम |

आसनं देव देवेश! प्रीत्यर्थ प्रति गृह्यताम ||

श्रीकुबेर देवाय आसनार्थे पञ्च पुष्पाणि समर्पयामि ||

मन्त्र अर्थ – हे देवताओं के ईश्वर! विविध प्रकार के रत्न से युक्त स्वर्ण-सज्जित आसन को प्रसन्नता हेतु ग्रहण करें। ॥भगवान् श्रीकुबेर के आसन के लिए मैं पाँच पुष्प अर्पित करता हूँ॥

नव उपचार पूजन (Nav Upchara Pujan)

इसके बाद ‘चन्दन-अक्षत-पुष्प-धूप-दीप-नैवेद्य’ से भगवान् श्रीकुबेर का पूजन निम्न मन्त्रों द्वारा करें।

श्रीकुबेराय नमः पादयोः पद्ध्म समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः शिरसि अर्घ्यं समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः गंधाक्षतं समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः पुष्पं समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः धूपं समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः दीपं समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः नेवेध्य्म समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः आचमनीयं समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः ताम्बूलं समर्पयामि
|

पूजन समर्पण (Puja Samarpan)

 

इस प्रकार पूजन करने के बाद बाएँ हाथ में गन्ध, अक्षत, पुष्प लेकर दाहिने हाथ द्वारा निम्न मन्त्र पढ़ते हुए ‘तिजोरी-बक्से’ आदि पर छोड़े। अब अपने बाए हाँथ में गंध, अक्षत और पुष्प को ले और अपने दाहिने हाँथ से निम्न मंत्रौचार के साथ तिजोरी या प्रतिमा पर छोड़े |

ॐ श्रीकुबेराय नमः |

अनेन पूजनेन श्रीध्नाध्यक्ष श्रीकुबेर प्रीयताम |

नमो नमः |

Muhurt for Dhanteras, Dhantrayodashi Puja in 2018

 

Dhantrayodashi Pradosh Kaal Muhurat

Date and Time
5th November 2018 (Monday)
Dhanteras Puja Muhurta18:20 to 20:17
Duration1 Hour 57 Mins
Pradosh Kaal17:42 to 20:17
Vrishabha Kaal18:20 to 20:18
Amavasya Tithi Begins01:24 on 05-Nov-2018
Amavasya Tithi Ends23:46 on 05-Nov-2018

 

पूजन सामग्री

  • कुबेर जी को बिठाने के लिए चौकी
  • चौकी पर बिछाने के लिए लाल कपडा
  • जल कलश
  • पंचामृत
  • रोली  और मोली
  • लाल चन्दन
  • सिन्दूर
  • लाल फूल और माला
  • धानी
  • सुपारी
  • लौंग
  • इलायची
  • नारियल
  • हल्दी, धनिया
  • कमलगट्टा
  • दूर्वा
  • फल
  • पंचमेवा
  • घी का दीपक
  • धूप , अगरबत्ती
  • कपूर
  • इत्र
  • मिठाई
  • गंगाजल

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